बच्चों को पढ़ाते समय कभी नहीं मारें। बच्चे अक्सर पढ़ते समय गलतियां करते हैं। कभी कभी बार बार एक ही बात समझाने पर भी नहीं समझ पाते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप बच्चे को मारना शुरू कर दें बल्कि आपको बच्चों को सिखाना है कि उन्हें अपनी गलतियों से सीख लेनी चाहिए।
जब अभिभावक पढ़ाते समय बच्चे पर हाथ उठाते हैं तो उन पर भावात्मक और शारीरिक असर दोनों पढ़ सकते हैं। बच्चे समझने के बजाय और भी ज्यादा जिद्दी या फिर गुस्सैल हो सकते हैं। बच्चे की लर्निंग एबिलिटीज पर भी फर्क पड़ सकता है। कोई भी बच्चा खुले और शांत दिमाग से ही कुछ नया सीख सकता है।
अगर आप उसपर हाथ उठाएंगे तो वह उदास हो सकता है। नाराज हो सकता है या फिर गुस्सा भी हो सकता है और इनमें से कोई भी भाव जो है वो कुछ नया बच्चे को नहीं सीखने देगा।
अगर आप बच्चों को मार मारकर पढ़ाएंगे तो बच्चे को यह संदेश मिलेगा कि अगर कभी कोई इंसान कोई काम ना करे तो उसे मार पीटकर काम करवा लेना चाहिए। इससे बच्चा भी हिंसक बन सकता है।
अगर बच्चा कभी पढ़ते समय कोई सवाल बार बार समझाने पर भी ना समझ पाए तो उसे वहीं छोड़ दें और बच्चे से कहें कि यह सवाल हम कल दोबारा शांत दिमाग से करेंगे।
कभी बच्चे का मन पढ़ने का ना हो तो बच्चे को विकल्प दें कि वह 15 मिनट पाठ पढ़ेगा या फिर आधे घंटे बाद पढ़ेगा। इससे बच्चा दिए हुए समय में खुद को पढने के लिए तैयार कर लेगा।
अगर कभी बच्चा कोई कंसेप्ट नहीं समझ पा रहा है तो उसे उसकी उस टॉपिक से जुड़ी कोई एक्टिविटी करवाएं या फिर उसे वो एक्टिविटी खुद करने को दे दें।
बच्चे को सेल्फ स्टडी का समय भी जरूर दें। सब कुछ उसे खुद ना बताकर कुछ चीजें बच्चों को खोजने का मौका दें। इससे वे बेहतर समझ पाएंगे।
हमारे भारतीय संविधान ने शिक्षकों के बच्चों पर हाथ उठाने को गैर कानूनी माना है, लेकिन बच्चे के पहले शिक्षक उसके अभिभावक होते हैं तो आपको भी बच्चे पर हाथ नहीं उठाना चाहिए और उनसे हर बात पर खुलकर बात करनी चाहिए।
